बाल सहभागिता पर बलरामपुर में यूनीसेफ व जिला प्रशासन ने आयोजित की कार्यशाला

 

जिला संवाददाता मोहम्मद अली शाह

बलरामपुर, 11 जनवरी, देश के विकास के लिए हमें अपनी आधी आबादी को सशक्त बनाना होगा जो कि बच्चे व महिलाएं हैं। हम बच्चों को देश का भविष्य कहते हैं पर हमें नहीं भूलना चाहिए कि वो वर्तमान भी हैं।

बाल सहभागिता के कार्यक्रमों को सार्थक एवं प्रभावी बनाने में जिला स्तर के अधिकारियों व हितधारकों की भूमिका पर बलरामपुर जिला मुख्यालय में यूपी पर्यटन विश्राम गृह में आयोजित परामर्श व संवेदीकरण कार्यशाला में बोलते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) गोविंद राम ने कहा कि किशोरो का आयु समूह सबसे महत्वपूर्ण है, समावेशी विकास के लिए जिसे उपेक्षित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बलरामपुर में शिक्षा विभाग ने युवकों व युवतियों के मंच बनाए हैं जिनका सहयोग संवेदीकरण व जागरुकता फैलाने के कार्यक्रमों में लिया जा सकता है। कार्यशाला का आयोजन यूनीसेफ व जिला प्रशासन ने शरणम सेवा समिति के सहयोग से किया।

कार्यशाला में बोलते हुए जिला युवा कल्याण अधिकारी प्रदीप त्रिपाठी नें कहा कि हम सभी उन समस्याओं का सामना कर चुके हैं जिनसे किशोर व किशोरियां आजकल गुजर रहे हैं। अब हमें उन्हें अपने अनुभव के आधार पर समाधान बताते हुए उन्हें जागरुक करना चाहिए। त्रिपाठी ने कहा कि बच्चों को अपने जीवन का लक्ष्य तय कर लेना चाहिए व उसी के अनुरुप तैयारी करनी चाहिए। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत मोहित ने बताया कि बलरामपुर जिले में कस्तूरबा विद्यालयों में ड्राप आउट बालिकाओं को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने जानकारी दी कि जिले के 640 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में आत्मरक्षा कार्यक्रम बालिकाओं के लिए संचालित किए जा रहे हैं।

जिला उप मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों बीपी सिंह व एसके श्रीवास्तव ने बच्चों व किशोरों के लिए चलाए जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी।

कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए यूनीसेफ की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने कहा कि बच्चों से बात किए बिना उनके विकास के लिए प्रभावी योजनाएं व कार्यक्रम नहीं बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जरुरत है कि बच्चों को लाभार्थी न समझा जाए बल्कि उन्हें उनका अधिकार दिलाने की पहल हो। किशोय न्याय अधिनियम व संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते का हवाला देते हुए निपुण गुप्ता ने कहा कि इसके तहत बच्चों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। भारत सरकार ने भी इस समझौते को संसद से अनुमोदन के बाद 1992 में लागू किया है। ग्राम सभा में गठित होने वाले बाल सभा व महिला सभा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गांव के विकास में उनकी सहभागिता के लिए यह किया गया है।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बलरामपुर में बाल संसद की प्रधानमंत्री अर्चना से संवाद रहा जिन्होंने बालिकाओं के प्रेरित करने के अपने अभियान की कहानी सुनाई और नुक्कड़ नाटकों का जिक्र किया। बाल संसद की मंत्री अंशिका ने यूनीसेफ के आधा पुल कार्यक्रम के तहत सीखी गयी छोटी-छोटी कहानियां सुनाई।

कार्यशाला में यूनीसेफ की बाल संरक्षण सलाहकार प्रशंसा ने बाल मनोविज्ञान के बारे में लोगों को जानकारी दी। बाल संरक्षण सलाहकार सत्यवान ने आंकड़ों के जरिए बलरामपुर जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण आदि पर किशोरों की दशा की जानकारी दी। वासित मलिक ने कार्यशाला के सहभागियों का परिचय दिया। कार्यशाला में महिला थाना उपनिरीक्षक चांदनी श्रीवास्तव, सीडब्लूसी सदस्य कविता श्रीवास्तव, शरणम सेवा समिति के संजीव जैन सहित पुलिस, जिला प्रशासन, ग्राम विकास, पंचायत राज, स्वास्थ्य, शिक्षा, किशोर न्यायलय, राष्ट्रीय सेवा योजना, आरकेएसएस, एनसीसी व युवा कल्याण विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

शरणम सेवा समिति के सचिव शरफ अब्बास ने सभी सहभागियों, वक्ताओं व अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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