नहर की पटरीसे मिट्टी खुदाई के मामले जांच करने पहुंची मुख्य विकास अधिकारी

बाराबंकी ।
जिले के विकास की मुखिया सी डी ओ एकता सिंह ने मीडिया में छपी खबरों को संज्ञान लेते हुएं बुधवार को नहर की पटरियों जांच करने पहुंची तो विभाग के अधिकारियों ने उन्हें गुमराह कर हकीकत से रूबरू नहीं होने दिया। ठेकेदार और खुद को बचाने में जुटे अधिकारियों ने उन्हें मकड़ जाल में उलझा कर असलियत से दूर कर दिया
शारदा सहायक खंड 28 के तहत आने वाली सुबेहा रजवहाकी सिल्ट उठाने के साथ-साथ ठेकेदार द्वारा अधिकारियों एवं जल उपभोक्ता समिति के पदाधिकारियों की के मिली भगत से नहर की इसके बाद बुधवार को अपराहन हैदरगढ़ पहुंची मुख्य विकास अधिकारी एकता सिंह खंड विकास अधिकारी आशुतोष कुमार श्रीवास्तव शारदा सहायक खण्ड 28 के अधिशासी अभियंता नवनीत एवं अन्य अधीनस्थों के साथ नहरो के निरीक्षण पर निकाली इस दौरान उन्होंने खंड 28 के तहत आने वाली लिल्हौरा रजवहा के संसारा गांव के निकट पड़ने वाले टेल के अलावा खानपुर माइनर के हेड का निरीक्षण किया ।। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के सर्विस रोड पर पड़ने वाली अंदऊमऊ माइनर का भी निरीक्षण किया जहां सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उन्हें सर्विस रोड के अगल-बगल पड़ने वाली
विधिवत खोदी गई माइनर का निरीक्षण करा दिया वही हैदरगढ़ भिटरिया मार्ग पर दौलतपुर गांव के निकट से पूर्वांचल अंडरपास के बीच में पड़ने वाली लगभग 400 मीटर की दूरी में बदहाल पड़ी माइनर की निरीक्षण कराने से परहेज रखा। इस दौरान सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सिर से लेकर तेल की बजाय जहां पर जरुरी समझी गई है वहीं पर सिल्ट सफाई या स्क्रेपिंग का कार्य कराया गया है।

मुख्य विकास अधिकारी का यह काफिला यहां से गोसूपुर गांव के लिए रवाना हुआ जहां पर अधिकारियों ने मुख्य विकास अधिकारी को हवाई निरीक्षण करवा कर जिला मुख्यालय के लिए विदा कर दिया। निरीक्षण के दौरान अवर अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता तक इस रजवहा से सिल्ट उठान के संबंध में कोई कागजात तथा रजवहा का नक्शा नहीं मौजूद था जबकि नियमों के तहत निरीक्षण के दौरान अवर अभियंता एवं सहायक अभियंता के पास एल सेक्शन के कागजात मौजूद होने चाहिए थे

लेकिन मौके पर मौजूद नहीं था।
इस के तहत नहर की गहराई कितनी, चौड़ाई कितनी, वर्म व डौला कितना पटरी कितनी सब कुछ दर्ज होता है लेकिन गोसुपुर के निकट रजवाहा के निरीक्षण के दौरान इंजीनियर के पास इस क्षेत्र का कोई भी कागज मौजूद नहीं था और हवा में ही बताया गया कि 4 मी पटरी हैं जिसके बाद इसकी नाप भी की गई।

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