सिरौलीगौसपुर (बाराबंकी)। तहसील क्षेत्र में वन विभाग की संदिग्ध भूमिका के चलते अवैध लकड़ी कटान चरम पर पहुंच गया है। हरियाली बचाने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, उन्हीं की मिलीभगत से क्षेत्र में प्रतिबंधित और हरे-भरे पेड़ों पर धड़ल्ले से आरा चलाया जा रहा है।
ताजा मामला कोतवाली बदोसरांय क्षेत्र का है। अद्रा गांव में 4 प्रतिबंधित आम के हरे पेड़ों को काटकर गिरा दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार दिनदहाड़े कटान हुआ और वन कर्मियों को सूचना देने के बाद भी मौके पर कोई कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
इसी तरह कस्बा बदोसरांय में पीएचसी अस्पताल के निकट लगा विशालकाय महुआ का पेड़ भी काटकर नष्ट कर दिया गया। यह पेड़ दशकों पुराना था।
अलीनगर गांव में तीन हरे पेड़ों पर आरा चला दिया गया, वहीं बदोसरांय मौर्या टोला बाग में 4 हरे पेड़ों को काट दिया गया है। मौके पर ठूंठ पड़े हैं, लेकिन पेड़ किस प्रजाति के थे, इसकी पहचान तक करना मुश्किल हो रहा है। वन कर्मियों ने इस संबंध में कोई जानकारी देना उचित नहीं समझा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिरौलीगौसपुर क्षेत्र में दर्जनों पेड़ों को आंधी-तूफान में गिरने का हवाला देकर कागजों में खानापूर्ति कर दी जाती है और पीछे से हरे पेड़ों की कटान कर लकड़ी पार करा दी जाती है।
पूरे मामले में वन क्षेत्राधिकारी से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका सरकारी नंबर नहीं उठा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और प्रभागीय वनाधिकारी से मामले की जांच कर दोषी वन कर्मियों और लकड़ी माफिया पर कार्रवाई की मांग की है।
